Jinvar Taru Shashan Aa Jagma Che Mahan | Prabhu Bhagti Geet | जिनवर तारू शासन आ जगमां छे महान,



Jinvar Taru Shashan Aa Jagma Che Mahan | Prabhu Bhagti Geet 
जिनवर तारू शासन आ जगमां छे महान

जिनवर तारू शासन आ जगमां छे महान,
एना आधारे , मारे तरवो आ संसार. .

मने एज तारशे, भव पार उतारशे,
मझधार मां नैया, कांठे पहोंचाडशे,
एवी  मुजने श्रध्धा छे, साचे साची श्रध्धा छे,
पाक्के पाये श्रध्धा छे, द्रढ मुजने श्रध्धा छे..

नश्वर सबंधो जयारे साथ छोडशे,
त्यारे निश्चय मारो हाथ पकडशे,
समजण देशे, सांत्वना देशे, शक्ति पण देशे,
भूलो जो पडीश, मुजने मार्ग ए देखाडशे,
ढीलो जो पडीश, मारुं सत्व ए वधारशे..

मुंझवण थशे तो मार्गदर्शन आपशे,
अवढव मां साची मने समजण आपशे,
मोक्ष मार्ग नुं एकांते आकर्शण आपशे,
पुरूषार्थ करशे एने, आधार आपशे,
समर्पित थयेला नुं ध्यान सदा राखशे..

अज्ञान अंधकार ने दूर करशे,
ज्ञाान ना अजवाळा ए जरूर करशे,
सत्य देशे, तत्व देशे, मिथ्यात्व हरशे,
अशुद्ध एवा आत्मा ने, शुध्ध ए बनावशे,
साधना करावी अंते, सिध्ध पण बनावशे..

शासन एकांते सैने सुखदायी छे,
शासनथी विपरीत सघळुं दुःखदायी छे,
जिनसाशन नी दरेक आज्ञा शीवदायी छे,
आज्ञा जे पाळशे ते, शीवसुख पामशे,
शरणे जशे जे एना, भव दुःख भांगशे

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