Eek Manorath Evo Che Lyrics Diksha Geet | एक मनोरथ एवो छे

Eek Manorath Evo Che lyrics
Diksha Geet
एक मनोरथ एवो छे

Eek Manorath Evo Che lyrics Diksha Geet एक मनोरथ एवो छे



एक मनोरथ एवो छे, वेश श्रमण नो लेवो छे
प्रभु चरणोमां रहेवुं छे, संयम मारे लेवुं छे

भव भ्रमणा दूर टळजो रे, पंथ प्रभु नो मळजो रे
अरजी ए अवधारजो, संयम जीवन आपजो
जाग्या छे एवा अरमान,श्रमण धर्मनुं देजोदान

भवोभवनो हुं प्यासी छुं,संयमनो अभिलाषी छुं
साद मारो सांभळजो रे, मारग तारो मळजो रे
वीर प्रभु नो अंश मळे, गुरु गौतम नो वंश मळे

संयम मरे लेवु छे, भव थी पार उतरवुं छे
रोम रोम थी प्रगटे नाद, संयमने दो आशीर्वाद
एक जंखना जागी छे, संयम भीक्षा मांगी छे

करुणा करजो ओ कीरतार,संयम देजो जगआधार
उर ना आसन खली छे, दीक्षा मुजने वाहली छे
वर्षो थी मीट मांडु छुं, संयम जीवन मांगु छुं




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