Girnar Mandan NemiJin Ne Bhaav Thi Karu Vandana | Jain Stuti Lyrics | गिरनार मंडण नेमिजिन ने भाव थी करुं वंदना.

Girnar Mandan NemiJin Ne Bhaav Thi Karu Vandana | Jain Stuti Lyrics | गिरनार मंडण नेमिजिन ने भाव थी करुं वंदना.


Girnar Mandan NemiJin Ne Bhaav Thi Karu Vandana | Jain Stuti Lyrics | गिरनार मंडण नेमिजिन ने भाव थी करुं वंदना.

जे  प्रभु ताणा संस्मरण थी, संतापना सवी मनना टळे,
जे  प्रभु ताणा दर्शन थकी, दुःख दुरित दर्द दूरे टळे ,
जे  प्रभु ताणा वंदन थकी, विरमे विषय ने वासना ,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥१॥

रमणीय राजुल जेवी नारी, त्यजी दीधी पळवार मां ,
रमणी नुं रूप विरूप लाग्युं ,पशुतणा पोकार मां,
राजीमती नुं शुं थशे? क्षणमात्र, नवी कारिकारी कल्पना,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥२॥

तोरण सुधी आवीने पण पांछा वळ्यां जीव प्रेमथी,
निर्दोष पशुओ नी कतल जोवाय केम प्रभु नेम थी,
अंतर बने करुणाभीनुं बस आटली मुज प्रार्थना,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥३॥

जे भोग ना काळे अनुपम योगने साधी गया,
वनिताना संगम काळमां विरति शुं प्रीत बांधी गया,
महासत्वशाळी शिरोमणी प्रभुसत्व नी करुं याचना,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥४॥

निष्काम निर्मल निर्विकारी नेमिनाथ नमुसदा,
चाहुं हुं उज्वळ जीवन मां लागे कलंक नहि कदा,
अविकारता रहो द्रष्टिमां बस आटली मुज प्रार्थना,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥५॥

अंजन सरीखा पण निरंजन राग द्वेष विनाश थी.
छो श्याम पण जीवन तमारुं शोभे शुभ प्रकाश थी,
केवो विरोधाभास तारा स्वरूप नी शी कल्पना,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥६॥

रैवतगिरी ना शिखर पर  प्रभु मुकुटमणि सम ओपता,
मनोहारिणी मुद्राथी भवीमां बोधी ना बीज रोपता,
हैयुं छे हर्षविभोर आजे, हवे ना रही कोई झंखनां,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥७॥

उतंगगीरी गिरनार नजरे दूर थी देखाय ज्या,
उभराय आनंद रोमें रोमें, नयन बे छलकाय त्यां,
मळशे हवे दर्शन प्रभु नुं, श्वासे श्वासे भावना,
गिरनार मंडण नेमिजिन ने, भाव थी करुं वंदना. ॥८॥

गिरनारगिरी शणगार तमने कोटी कोटी वंदना,
राजुल तणा भरतार तमने कोटी कोटी वंदना,
योगीश्वरो ना नाथ तमने कोटी कोटी वंदना,
नव भव तणा संगाथ तमने कोटी कोटी वंदना. ॥९॥


Girnar Stuti, 

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