रजोहरण मारू मंगलसुत्र होजो,
मारी मुहपत्ती हाथ नु मींढण होजो,
तारी प्रीत नु पानेतर पेरी आवु छुं,
तारा प्रेम मां गुरूजी भिंजाउ छुं ॥
तारा चरणो नी धुळ गुरू देव, चंदन गुलाल बने,
जेणे धरीए मस्तक एनी तक्दीर बने ॥
चरण धुळथी वधीने जगमां चीझ कोइ अनमोल नथी,
हर वस्तु नु मुल छे किंतु आनु कोइ मुल्य नथी,
देवताओ झंखे आधुळी ने आधुळी केटली पावन,
जनमो जनम ना कर्मो खपावे पुण्यथी भरीदे आ जीवन,
तारा चरणोनी...
भवपार थइ गइ चंदनबाळा वीर शरण मां जावाथी,
निरमल थइ गया श्रेणिक राजा वीर चरण ना स्पर्शथी,
गुरू चरणोनी महिमा बतावे युग युग थी आ आगम ज्ञान,
काळा पंछीओ हंस थइ गया चरण धुळमां करीने स्नान,
तारा चरणोनी...
जे चरणोमां गंगा वहेती ए चरणोमां मोक्ष मळे,
पळ्यो रहे जे चरण धुळीमां एने कदिना मोक्ष मळे,
अढसठ तीरथ ना देवताओ आंठे प्रहर करे तारू स्मरण,
सदगुरू ना चरणो मां वसे छे मारू पावनकारी जीवन,
तारा चरणोनी...

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